Monday, August 15, 2011

एक दफ़ा यूं ही.....

एक दफ़ा यूं ही.....

राह में चलते चलते मैने उसका हांथ अपने हांथो मे लिया !

तो वो मुस्कुरा दिया !

उसने कहा..... "तुम्हारे हांथ किस कदर गरम हैं और गरम हांथ वफ़ा की निशानी होते हैं"
मैं इस बात पर इस कदर ख़ुश हुई की सब कुछ भूल गयी !

मगर बरसो बाद आज इस बात का एहसास हूआ की उसके हांथ
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किस कदर ठंडे थे ।!



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